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Waqt || waqt hindi shayari

Ek waqt hi toh hai jo hamesha badal ta hai

Kitna bhi kosish karlo rukta nahi hai

Yeh kisika nahi hai gulam

Chhin ne pe aajaye toh le jaata hai sukh,chain aur aaram

Sab iske ishare par chalte hain

Jin hone manaa kiya woh jalte hain

Ye waqt kuch chhin ta hai,toh wapas bahut kuch deta hai

Jeene ka,hasne ka,pyaar karne ka phir se ek mauka deta hai

Khusiyon ki shaugaat,lamho ki baarat deta hai

Tute hue dil ke zakham ko marham deta hai

Aur pyaar karne waalon ko milne ka ek haseen mulaqaat deta hai

Title: Waqt || waqt hindi shayari

Best Punjabi - Hindi Love Poems, Sad Poems, Shayari and English Status


कवि और धनवान आदमी : अकबर-बीरबल की कहानी

एक दिन एक कवि किसी धनी आदमी से मिलने गया और उसे कई सुंदर कविताएं इस उम्मीद के साथ सुनाईं कि शायद वह धनवान खुश होकर कुछ ईनाम जरूर देगा। लेकिन वह धनवान भी महाकंजूस था, बोला, “तुम्हारी कविताएं सुनकर दिल खुश हो गया। तुम कल फिर आना, मैं तुम्हें खुश कर दूंगा।”

‘कल शायद अच्छा ईनाम मिलेगा।’ ऐसी कल्पना करता हुआ वह कवि घर पहुंचा और सो गया। अगले दिन वह फिर उस धनवान की हवेली में जा पहुंचा। धनवान बोला, “सुनो कवि महाशय, जैसे तुमने मुझे अपनी कविताएं सुनाकर खुश किया था, उसी तरह मैं भी तुमको बुलाकर खुश हूं। तुमने मुझे कल कुछ भी नहीं दिया, इसलिए मैं भी कुछ नहीं दे रहा, हिसाब बराबर हो गया।”

कवि बेहद निराश हो गया। उसने अपनी आप बीती एक मित्र को कह सुनाई और उस मित्र ने बीरबल को बता दिया। सुनकर बीरबल बोला, “अब जैसा मैं कहता हूं, वैसा करो। तुम उस धनवान से मित्रता करके उसे खाने पर अपने घर बुलाओ। हां, अपने कवि मित्र को भी बुलाना मत भूलना। मैं तो खैर वहां मैंजूद रहूंगा ही।”

कुछ दिनों बाद बीरबल की योजनानुसार कवि के मित्र के घर दोपहर को भोज का कार्यक्रम तय हो गया। नियत समय पर वह धनवान भी आ पहुंचा। उस समय बीरबल, कवि और कुछ अन्य मित्र बातचीत में मशगूल थे। समय गुजरता जा रहा था लेकिन खाने-पीने का कहीं कोई नामोनिशान न था। वे लोग पहले की तरह बातचीत में व्यस्त थे। धनवान की बेचैनी बढ़ती जा रही थी, जब उससे रहा न गया तो बोल ही पड़ा, “भोजन का समय तो कब का हो चुका ? क्या हम यहां खाने पर नहीं आए हैं ?”

“खाना, कैसा खाना ?” बीरबल ने पूछा।

धनवान को अब गुस्सा आ गया, “क्या मतलब है तुम्हारा ? क्या तुमने मुझे यहां खाने पर नहीं बुलाया है ?”

खाने का कोई निमंत्रण नहीं था। यह तो आपको खुश करने के लिए खाने पर आने को कहा गया था।” जवाब बीरबल ने दिया। धनवान का पारा सातवें आसमान पर चढ़ गया, क्रोधित स्वर में बोला, “यह सब क्या है? इस तरह किसी इज्जतदार आदमी को बेइज्जत करना ठीक है क्या ? तुमने मुझसे धोखा किया है।”

अब बीरबल हंसता हुआ बोला, “यदि मैं कहूं कि इसमें कुछ भी गलत नहीं तो…। तुमने इस कवि से यही कहकर धोखा किया था ना कि कल आना, सो मैंने भी कुछ ऐसा ही किया। तुम जैसे लोगों के साथ ऐसा ही व्यवहार होना चाहिए।”

धनवान को अब अपनी गलती का आभास हुआ और उसने कवि को अच्छा ईनाम देकर वहां से विदा ली।

वहां मौजूद सभी बीरबल को प्रशंसा भरी नजरों से देखने लगे।

Title: कवि और धनवान आदमी : अकबर-बीरबल की कहानी


Baat adhoori nhi hoti || hindi shayari

Tujhse batein karke bhi, meri baat poori nhi hoti.
Tujhe yaad kiye bina, meri raat poori nhi hoti
Tujhse roj milkar bhi, meri mulakat poori nhi hoti
Koi khushi meri, paye bina tera hath poori nhi hoti
Jaise khoob baras ke bhi dharti ke liye barsaat poori nhi hoti
Vesa hi tujhe paane ki chahat bhi chahat ke sath poori nhi hoti
Jaanta hu sirf baat karne se baat hatho hath poori nhi hoti
Lekin..
Baton baton mein ko baat karni thi vo keh dete to baat adhoori nhi hoti..

तुझसे बातें करके भी, मेरी बात पूरी नहीं होती..
तुझे याद किए बिना, मेरी रात पूरी नहीं होती..
तुझसे रोज मिलकर भी, मेरी मुलाकात पूरी नहीं होती..
कोई खुशी मेरी, पाए बिना तेरा साथ पूरी नहीं होती..
जैसे खूब बरस के भी धरती के लिए बरसात पूरी नहीं होती..
वैसा ही तुझे पाने की चाहत भी चाहत के साथ पूरी नहीं होती..
जनता हूं सिर्फ बात करने से बात हाथों हाथ पूरी नहीं होती..
लेकिन..
बातों बातों में जो बात कहनी थी वो कह देते तो बात अधूरी नहीं होती..

Title: Baat adhoori nhi hoti || hindi shayari