वो शमा की महफ़िल ही क्या,
जिसमे दिल खाक ना हो,
मज़ा तो तब है चाहत का,
जब दिल तो जले, पर राख ना हो
वो शमा की महफ़िल ही क्या,
जिसमे दिल खाक ना हो,
मज़ा तो तब है चाहत का,
जब दिल तो जले, पर राख ना हो
मेरी ज़िन्दगी के जो पल तूने छीने है
याद रखना तुझको भी वही जीने है।।
लेना देना रस्मे नाते ये चलेंगे जीवनभर
पर तेरे लिए प्यार ना बचा अब रत्तीभर।।
अपने हर पल को जीया मेरे से पहले तूने
बारी मेरी आयी तो दिया प्यार का जहर तूने।।
समझ मुझे अब आने लगा है खेल तेरा
जरूरत को तूने अपनी बताया प्यार मेरा।।
मेरी मासूमियत का ये जो फायदा उठाया है
भोली सी ‘गुड़िया’ को प्यार में जलाया है।।
सच्चा प्यार था तेरा तो बचा अब कुछ क्यो नही
एक दिल की आह को दिल से लगाया क्यो नही।।
दिल मेरा आज जो ये रोता है ना
सब्र का एक घुट रोज पीता है ना।।
बदल जाएगी अब ये जिंदगी भी मेरी
जहां अब जगह ना होगी इसमे तेरी।।।
Nit teriyaan yaadan nu main likhan
kaante maaran, paarran varke
te fir likhaan …..