वो शमा की महफ़िल ही क्या,
जिसमे दिल खाक ना हो,
मज़ा तो तब है चाहत का,
जब दिल तो जले, पर राख ना हो
Enjoy Every Movement of life!
वो शमा की महफ़िल ही क्या,
जिसमे दिल खाक ना हो,
मज़ा तो तब है चाहत का,
जब दिल तो जले, पर राख ना हो

हम आए थे इस रोज
जब तेरा निकाह था
तूने देखा नही शायद
में वही खड़ा था
पूछता तुझसे से मगर तू तो खुश थी
और वो आखरी दिन था जब मैं हसा था