Jaroori nahi ke pyaar hamesha kisi ki shakal se hi ho
kabhi kabhi kisike nature se bhi pyaar ho jaata hai
जरुरी नहीं☝ की प्यार❤ हमेशा किसीकी शक्ल👨 से ही हो,,,,
कभी कभी किसीके #NåTuRê😌 से भी प्यार❤ हो जाता है..
Jaroori nahi ke pyaar hamesha kisi ki shakal se hi ho
kabhi kabhi kisike nature se bhi pyaar ho jaata hai
जरुरी नहीं☝ की प्यार❤ हमेशा किसीकी शक्ल👨 से ही हो,,,,
कभी कभी किसीके #NåTuRê😌 से भी प्यार❤ हो जाता है..
Zindagi do shabadaan vich is tarah arajh hai
Adhi k karaz hai
Adhi k faraz hai
ਜ਼ਿੰਦਗੀ ਦੋ ਸ਼ਬਦਾਂ ਵਿੱਚ ਇਸ ਤਰ੍ਹਾਂ ਅਰਜ਼ ਹੈ:
ਅੱਧੀ ਕ ਕਰਜ਼ ਹੈ,
ਅੱਧੀ ਕ ਫਰਜ਼ ਹੈ..
“सोचता हूँ, के कमी रह गई शायद कुछ या
जितना था वो काफी ना था,
नहीं समझ पाया तो समझा दिया होता
या जितना समझ पाया वो काफी ना था,
शिकायत थी तुम्हारी के तुम जताते नहीं
प्यार है तो कभी जमाने को बताते क्यों नहीं,
अरे मुह्हबत की क्या मैं नुमाईश करता
मेरे आँखों में जितना तुम्हें नजर आया,
क्या वो काफी नहीं था I
सोचता हूँ के क्या कमी रह गई,
क्या जितना था वो काफी नहीं था
“सोचता हूँ कभी पन्नों पर उतार लूँ उन्हें I
उनके मुँह से निकले सारे अल्फाजों को याद कर लूँ कभी I
ऐसी क्या मज़बूरी होगी उनकी की हम याद नहीं आते I
सोचता हूँ तोहफा भेज कर अपनी याद दिला दूँ कभी I
सोचता हूँ कभी पन्नों पर उतार लूँ उन्हें I