गुज़र रहे हैं जिंदगी के पल कभी खुशी में तो कभी ग़मी में ।
होती हैं खुशियां कभी सातवें आसमा पर ओर कभी ज़मी पे।
Guzr rahe hain zindagi ke pall kabhi khushi me to kabhi gami me…..
hoti hain Khushyan kabhi saatwe aasma pr or kabhi zamee pe….
गुज़र रहे हैं जिंदगी के पल कभी खुशी में तो कभी ग़मी में ।
होती हैं खुशियां कभी सातवें आसमा पर ओर कभी ज़मी पे।
Guzr rahe hain zindagi ke pall kabhi khushi me to kabhi gami me…..
hoti hain Khushyan kabhi saatwe aasma pr or kabhi zamee pe….
Murari vo beete huye pal likhu
Ya is baisakh ki tapti dhup likhu😶
मुरारी वो बीते हुए पल लिखूं
या इस बैसाख की तपती धूप लिखूं😶
बंदिशों से अब कैसे खुदकी करूं हिफाज़त मैं,
सवेरे से है मोहब्बत पर, अंधेरों में रहने कि आदत है…
आफ़त है कि चिराग़ का इल्म कैसे होगा,
पता नहीं जब सवेरा होगा तो क्या होगा…
क्या होगा जो खुदसे कर लूं बगावत मै,
जीत लूं खुदको अगर हार जाऊं तो आफ़त है…
हारने का शोंक नहीं लड़ना अब रास नहीं आता,
सब कहते है मुझे तू हरकतों से बाज़ नहीं आता…
देखो, हरकतों में भी मेरी तहज़ीब और शराफत है,
जीत लेंगे दुनिया भी अगर रब की इजाज़त है… 🙃