नाराजगी उस सादगी पे जचती थी बड़ी
गुस्से में भी प्यारी लगती थी बड़ी🥰
कुछ हादसे ने छीनी है मुस्कुराहट उसकी
वरना हर बात पे वो हस्ती थी बड़ी🥀
नाराजगी उस सादगी पे जचती थी बड़ी
गुस्से में भी प्यारी लगती थी बड़ी🥰
कुछ हादसे ने छीनी है मुस्कुराहट उसकी
वरना हर बात पे वो हस्ती थी बड़ी🥀
ये एक बात समझने में रात हो गई है
मैं उस से जीत गया हूँ कि मात हो गई है
मैं अब के साल परिंदों का दिन मनाऊँगा
मिरी क़रीब के जंगल से बात हो गई है
बिछड़ के तुझ से न ख़ुश रह सकूँगा सोचा था
तिरी जुदाई ही वज्ह-ए-नशात हो गई है
बदन में एक तरफ़ दिन तुलूअ’ मैं ने किया
बदन के दूसरे हिस्से में रात हो गई है
मैं जंगलों की तरफ़ चल पड़ा हूँ छोड़ के घर
ये क्या कि घर की उदासी भी साथ हो गई है
रहेगा याद मदीने से वापसी का सफ़र
मैं नज़्म लिखने लगा था कि ना’त हो गई है
Likh y dil diyan gallan panne asi padi janne haan
Chete kr kr oonu khud nu har pal mari janne haan