“ना दिल माना, ना रूह मानी, अब तू मेरे साथ नहीं है..
तुझे कोई मुझसे अलग करदे, किसी की औकात नहीं है..
जमाने ने झूठ बोला, चला लिया मैंने…
वादा करके भी वापस ना लौटी तू, ये तो कोई बात नहीं है…।”
“ना दिल माना, ना रूह मानी, अब तू मेरे साथ नहीं है..
तुझे कोई मुझसे अलग करदे, किसी की औकात नहीं है..
जमाने ने झूठ बोला, चला लिया मैंने…
वादा करके भी वापस ना लौटी तू, ये तो कोई बात नहीं है…।”
Mom se hain gir rahe armaan yun pighal ke
Angaro mein sulagh rahi kuch aag halke halke
Mausam badal rahe palkein bhiga rahe hain
Kuch lamhe beete kal ke kuch lamhe aaj kal ke
मोम से हैं गिर रहे अरमां यूं पिघल के
अंगारों में सुलग रही कुछ आग हल्के हल्के
मौसम बदल रहे पलकें भीगा रहे हैं
कुछ लम्हे बीते कल के कुछ लम्हे आज कल के
Woh khamosh kush is tarah kadar hai
jaise koi intkaam le reha hai
वो खामोश कुछ इस कदर है
जैसे कोई इंतकाम ले रहा हो।।
~रूचिता सिन्हा