कितना हारा होगा हमारा दिल
जब किसे ने सवारा होगा तुम्हारा दिल
टुकड़े इतने की गिन नही पाओ गी
टाके इतने की सिल नही पाओ गी
मेरी इस हालत पे भी मुंह मोड़ लिया
क्या प्थर हो गया है तुम्हारा दिल
कितना हारा होगा हमारा दिल
जब किसे ने सवारा होगा तुम्हारा दिल
टुकड़े इतने की गिन नही पाओ गी
टाके इतने की सिल नही पाओ गी
मेरी इस हालत पे भी मुंह मोड़ लिया
क्या प्थर हो गया है तुम्हारा दिल

बेवफा ने दिल को कई जख्म दिए, कभी मार दिया, कभी छोड़ दिया..
उसे मेरे दिल पे अपना नाम दिखा, फिर भी मुझसे मुँह मोड़ लिया..
मुकदमा हुआ उसपर तो, बेगुनाही निकली वो..
उसके पास अपना दिल था ही नहीं, उसने मेरा लिया या तोड़ दिया..