कितना हारा होगा हमारा दिल
जब किसे ने सवारा होगा तुम्हारा दिल
टुकड़े इतने की गिन नही पाओ गी
टाके इतने की सिल नही पाओ गी
मेरी इस हालत पे भी मुंह मोड़ लिया
क्या प्थर हो गया है तुम्हारा दिल
Enjoy Every Movement of life!
कितना हारा होगा हमारा दिल
जब किसे ने सवारा होगा तुम्हारा दिल
टुकड़े इतने की गिन नही पाओ गी
टाके इतने की सिल नही पाओ गी
मेरी इस हालत पे भी मुंह मोड़ लिया
क्या प्थर हो गया है तुम्हारा दिल
mazboor ho ke nahi hunda har koi judaa
kujh lok marzi nu majboori keh dinde ne
ਮਜ਼ਬੂਰ ਹੋ ਕੇ ਨਹੀਂ ਹੁੰਦਾ ਹਰ ਕੋਈ ਜੁਦਾ..
ਕੁੱਝ ਲੋਕ ਮਰਜੀ ਨੂੰ ਮਜਬੂਰੀ ਕਹਿ ਦਿੰਦੇ ਨੇ ..
जमाना किस दिन मेरी बात सुनेगा।
मेरे सवाल कड़ी धूप की रेत में खड़े है।
बिस्तर पे लगे थे उनके भी ज़ख्म भर गए,
जिनके सपने मेरे से दस साल बड़े है।