आंखें अगर कमजोर होती तो शायद दिल ना लगाते..
जब देख ही नहीं पाते, तो उनसे यूंही थोड़ी ना मिल जाते..
ना उनके चेहरे का दीदार होता, ना आँखों में डूब जाते..
ना आज गमों में होते, ना खुद को मुश्किल में पाते..
आंखें अगर कमजोर होती तो शायद दिल ना लगाते..
जब देख ही नहीं पाते, तो उनसे यूंही थोड़ी ना मिल जाते..
ना उनके चेहरे का दीदार होता, ना आँखों में डूब जाते..
ना आज गमों में होते, ना खुद को मुश्किल में पाते..
काश,जिंदगी सचमुच किताब होती
पढ़ सकता मैं कि आगे क्या होगा?
क्या पाऊँगा मैं और क्या दिल खोयेगा?
कब थोड़ी खुशी मिलेगी, कब दिल रोयेगा?
काश जिदंगी सचमुच किताब होती,
फाड़ सकता मैं उन लम्हों को
जिन्होने मुझे रुलाया है..
जोड़ता कुछ पन्ने जिनकी यादों ने मुझे हँसाया है…
खोया और कितना पाया है?
हिसाब तो लगा पाता कितना
काश जिदंगी सचमुच किताब होती,
वक्त से आँखें चुराकर पीछे चला जाता..
टूटे सपनों को फिर से अरमानों से सजाता
कुछ पल के लिये मैं भी मुस्कुराता,
काश, जिदंगी सचमुच किताब होती।
Na mzak banaya kar zinde ni
Thoda taras taan khaya kar zinde ni..!!
Asi mar mukk jana ajj kal vich
Sanu bahuta na staya kar zinde ni..!!
ਨਾ ਮਜ਼ਾਕ ਬਣਾਇਆ ਕਰ ਜ਼ਿੰਦੇ ਨੀ
ਥੋੜਾ ਤਰਸ ਤਾਂ ਖਾਇਆ ਕਰ ਜ਼ਿੰਦੇ ਨੀ..!!
ਅਸੀਂ ਮਰ ਮੁੱਕ ਜਾਣਾ ਅੱਜ ਕੱਲ੍ਹ ਵਿੱਚ
ਸਾਨੂੰ ਬਹੁਤਾ ਨਾ ਸਤਾਇਆ ਕਰ ਜ਼ਿੰਦੇ ਨੀ..!!