Tera te mera sohneyaa aina hi pyar c
badli hawa de ik jhonke di maar c
Tera te mera sohneyaa aina hi pyar c
badli hawa de ik jhonke di maar c

Kad nibhi aa kakhan di hawaaan de naal
bewafai kad turi hawawaan de naal
eh dil v pagal e samajhda nahi
mukadrr nahi badalde duwawa naal
“थोड़ा थक सा जाता हूं अब मै…
इसलिए, दूर निकलना छोड़ दिया है,
पर ऐसा भी नही हैं कि अब…
मैंने चलना ही छोड़ दिया है।
फासलें अक्सर रिश्तों में…
अजीब सी दूरियां बढ़ा देते हैं,
पर ऐसा भी नही हैं कि अब मैंने..
अपनों से मिलना ही छोड़ दिया है।
हाँ जरा सा अकेला महसूस करता हूँ…
खुद को अपनों की ही भीड़ में,
पर ऐसा भी नहीं है कि अब मैंने…
अपनापन ही छोड़ दिया है।
याद तो करता हूँ मैं सभी को… और परवाह भी करता हूँ सब की, पर कितनी करता हूँ… बस, बताना छोड़ दिया है।।”