Asin aashiq nahi si jado naal si oh,
ohdi yaad ne aashiq bna dita,
ASiN ni marna si naal talvara de,
Jadon saal baad mili
ohdi akh naal akkh de vaar ne muka ditta…?”
Asin aashiq nahi si jado naal si oh,
ohdi yaad ne aashiq bna dita,
ASiN ni marna si naal talvara de,
Jadon saal baad mili
ohdi akh naal akkh de vaar ne muka ditta…?”
देखती हु उन्हें रोज़ खिड़की से कुछ तलाश करते हुए शायद खुद की ज़मीर को खोजते हैँ
और खुद ही ना जवाब पाकर .. चुप चाप चले जातें हैँ
शायद वो समझ नी पाते जिसे वो खोजते वो उनका ज़मीर नी उनके अंदर का टुटा प्यार है ..
हर रोज़ बस अड़े पर दीखते हैँ वो ..
और फिर भी अपने घर से ना जाने कैसे मेरे घर तक आजाते हैँ .. आसमान मे देख कर कहते हैँ की..भूल जाता हूँ अपना घर
इश्क़ का नशा जो तेरा अब तक चढ़ा है ..
देखती हु वो बैग दिया हुआ मेरा .. आज तक अपने संघ रखते हैँ मानो जैसे कलेजे को ठंडक देने वाला जलजीरा हो ..या आँखों को सुलघाने वाला चमकता हीरा हो ..
पर बुधु जो हैँ इन सबमे अपना रुमाल ही भूल जाते हैँ .
जानती हु वो बस मुझे याद करते हैँ ..
तभी तो शीशे के सामने आने से हटते हैँ
अपनी शकल बता कर मेरी शकल भूलने से डरते हैँ
पहले सामने थे मेरे देखती हु अब ऊपर से वो इश्क़ जो मेरा था वो जो खो गया…..
Jao yaha rehna khush rehna
Khwahish to ibadat si ho gayi hai
Tum se juda hokar tanhayion mein rehna
Meri ab aadat si ho gayi hai…💔
जाओ जहां रहना खुश रहना
ख्वाइश तो इबादत सी हो गई है
तुम से जुदा होकर तन्हाइयो में रहना
मेरी अब आदत सी हो गई है …💔