बात बस इतनी सी है कि... जिस दर में सिर झुकाओ तो अपनी नीयत साफ रखना, दुआएं भी नीयत से होती है, दुआओं की कोई नीयत नहीं होती...
बात बस इतनी सी है कि... जिस दर में सिर झुकाओ तो अपनी नीयत साफ रखना, दुआएं भी नीयत से होती है, दुआओं की कोई नीयत नहीं होती...
Awe nai koi jagda raata nu
parda roohi kitaban nu
koi satt tan laghi e tainu zaroor dila
ਐਂਵੇਂ ਨਈ ਕੋਈ ਜਾਗਦਾ ਰਾਤਾਂ ਨੂੰ
ਪੜਦਾ ਕੋਈ ਰੂਹੀ ਕਿਤਾਬਾਂ ਨੂੰ
ਕੋਈ ਸੱਟ ਤਾਂ ਲੱਗੀ ਏ ਤੈਨੂੰ ਜ਼ਰੂਰ ਦਿਲਾ
कितने गुज़र गए ज़माने यूँ ज़ख्म खाने में,
बडा वक़्त लगाते हो यार मरहम लगाने में.
दासबर्दार तेरे इश्क़ में आशनाई गवा बैठे,
बावर्णा दिल-खवा अपने भी थे ज़माने में.
जो क़ल्ब परोसता है ग़ज़लों में बेदिली से मुसाहिब,
मुझे भी तोह सुना कोनसा ग़म है तेरे अफ़साने में.
मेरा ग़म कौन जाने मैं पौधा ही जानू हिज्र-ए-गुल,
बीस दिन लगते है अशर कली को फूल बनाने में…