बेवफा ने दिल को कई जख्म दिए, कभी मार दिया, कभी छोड़ दिया..
उसे मेरे दिल पे अपना नाम दिखा, फिर भी मुझसे मुँह मोड़ लिया..
मुकदमा हुआ उसपर तो, बेगुनाही निकली वो..
उसके पास अपना दिल था ही नहीं, उसने मेरा लिया या तोड़ दिया..
बेवफा ने दिल को कई जख्म दिए, कभी मार दिया, कभी छोड़ दिया..
उसे मेरे दिल पे अपना नाम दिखा, फिर भी मुझसे मुँह मोड़ लिया..
मुकदमा हुआ उसपर तो, बेगुनाही निकली वो..
उसके पास अपना दिल था ही नहीं, उसने मेरा लिया या तोड़ दिया..
कमाल करते हैं
हमसे जलन रखने वाले,
महफ़िलें खुद की सजाते हैं
और चर्चे हमारे करते हैं।
मेरे लफ़्ज़ों को
महफूज कर लो दोस्तों.
हमारे बाद बहुत सन्नाटा होगा,
इस महफ़िल में.
इक इश्तहार छपा है अखबार में,
खुली सांसे भी बिकने लगी बाज़ार में,
रूह भी निचोड़ ली उसकी,
काट दी ज़बान बेगुनाह की,
मसला कुछ ज़रूरी नहीं,
बस थोड़ी बहस चलती है सरकार में...