
Akhiyaan de kol sda rahi sajjna Asi lakh vaari tak ke v nahi rajjna mukh na modhi saadha jor koi na saanu chhadd ke na jai saadha hor koi naa

Suno
मेरे लफ्जो को पढ़ने वालो
मेरे लफ्जो को समझ जाया
करो
ये लफ्जो मैं है एहसास मेरे
कभी इन्हे भी महसूस कर लिया
करो
अगर औरत नहीं होती, तो मुहब्बत नहीं होती।
अगर बंगाल माँ नहीं होती, तो भारत माता भी नहीं होती।
हर एक इंसान के पास दिल है।
भारत में भी बंगाल है।
मर्द सिर्फ इंसान होता है।
औरत केवल माँ होती है।
इंसान को दुःख देने में बहुत मज़ा आता है।
इंसान का दुःख में सिर्फ कुत्ते रोते हैं।
जिंदगी का स्टेशन पर ट्रेन रुक गई।
समय कभी रुकता नहीं, छुट्टी गुज़र गई।
समय की नदी, मैं अकेला नहीं।
पिता नाव है, माँ मांझी, जिंदगी यही।