
लेकिन खुश आज फिर भी तुम नहीं।
यह चांद बुझा-बुझा सा लग रहा है
पास से न तो दूर से ही सही ।।
दु:ख तो बहुत मुझे तेरे दर्द का
अपना ना तो पराया ही सही ।
काश ! मैं तेरे दर्द भी अपनी तरफ मोड़ पाता
पर मैं बदकिस्मत तेरे हाथ की एक लकीर तक नहीं ।।
Enjoy Every Movement of life!

Kitho liyawa alfaz oh labb ke
Bayan kar sakan Jo mohobbat meri nu..!!
ਕਿੱਥੋਂ ਲਿਆਵਾਂ ਅਲਫਾਜ਼ ਉਹ ਲੱਭ ਕੇ
ਬਿਆਨ ਕਰ ਸਕਣ ਜੋ ਮੋਹੁੱਬਤ ਮੇਰੀ ਨੂੰ..!!
और फिर कब तक वहा रहता मैं
और कब तक कुछ ना कहता मै
फिर मैने वो बोल ही दिया
कब तक यू चुप चाप रहता मैं
और फिर मरना ही मुनासिब समझा हमने
आखिर के तक ये सब सहता मैं