
लेकिन खुश आज फिर भी तुम नहीं।
यह चांद बुझा-बुझा सा लग रहा है
पास से न तो दूर से ही सही ।।
दु:ख तो बहुत मुझे तेरे दर्द का
अपना ना तो पराया ही सही ।
काश ! मैं तेरे दर्द भी अपनी तरफ मोड़ पाता
पर मैं बदकिस्मत तेरे हाथ की एक लकीर तक नहीं ।।

tu mil gaee hai to mujh pe naaraaj hai khuda,
kahata hai kee tu ab kuchh maangata nahin hai…
तु मिल गई है तो मुझ पे नाराज है खुदा,
कहता है की तु अब कुछ माँगता नहीं है… 😘🥰🥰
मुश्किल रहा होगा उन खतों✉️ का जवाब, तभी उसे देने से इंकार है..
जवाब तो मेरे लिए खास है, क्यूंकि खतों में प्यार❤️ का इजहार है..
क्या समझूँ उसकी चुप्पी को? ऐतराज है, या उसे भी जरा सा प्यार💙 है..
इस वक्त मेरा दिल कहीं और नहीं लगता, मुझे बस उसकी हां का इंतजार है..