
लेकिन खुश आज फिर भी तुम नहीं।
यह चांद बुझा-बुझा सा लग रहा है
पास से न तो दूर से ही सही ।।
दु:ख तो बहुत मुझे तेरे दर्द का
अपना ना तो पराया ही सही ।
काश ! मैं तेरे दर्द भी अपनी तरफ मोड़ पाता
पर मैं बदकिस्मत तेरे हाथ की एक लकीर तक नहीं ।।

Us nu chaheyaa tan bahut c
par oh miliyaa hi nahi
meriyaan lakhan koshishan de bawjood
faasla mitteya hi nahi
ਉਸ ਨੂੰ ਚਾਹਿਆ ਤਾਂ ਬਹੁਤ ਸੀ,
ਪਰ ਉਹ ਮਿਲਿਆ ਹੀ ਨਹੀ…
ਮੇਰੀਆਂ ਲੱਖ ਕੋਸ਼ਿਸ਼ਾਂ ਦੇ ਬਾਵਜੂਦ,
ਫਾਸਲਾ ਮਿਟਿਆ ਹੀ ਨਹੀਂ !!!
हमारा तिरंगा
देश का प्रतीक है यह,
हर हिंदुस्तानी के नज़दीक है यह।
हर डर भुला देता है,
एक जोश जगा देता है।
सूरज सा ‘नारंगी’ तेज है इसमें,
शांति का ‘सफेद’ संदेश है इसमें।
इसमे खुशिओं की ‘हरियाली’ है,
यह चक्रवर्ती ‘चक्रधारी’ है।
वो फसलों सा लहराता है,
वो हर ऊंचाई से ऊपर जाता है।
एक बच्चे सा भोला है यह,
वक़्त पड़ने पर दहकता शोला है यह।
मित्रों का मीत है यह,
हर बुराई पर जीत है यह।
जीने का अंदाज़ है यह,
अपनी माटी का एहसास है यह।
इसकी अलग ही शान है,
यह हमारा तिरंगा महान है।।