
लेकिन खुश आज फिर भी तुम नहीं।
यह चांद बुझा-बुझा सा लग रहा है
पास से न तो दूर से ही सही ।।
दु:ख तो बहुत मुझे तेरे दर्द का
अपना ना तो पराया ही सही ।
काश ! मैं तेरे दर्द भी अपनी तरफ मोड़ पाता
पर मैं बदकिस्मत तेरे हाथ की एक लकीर तक नहीं ।।
Enjoy Every Movement of life!

हस कर देखा लोगों के कहने से
समझाया दिल को भी
पर चेहरे पर हंसी युही कहा आती हैं
भुलाना आसान नहीं होता किसी को
जितना यह दुनिया बतातीं हैं
—ਗੁਰੂ ਗਾਬਾ 🌷
