
लेकिन खुश आज फिर भी तुम नहीं।
यह चांद बुझा-बुझा सा लग रहा है
पास से न तो दूर से ही सही ।।
दु:ख तो बहुत मुझे तेरे दर्द का
अपना ना तो पराया ही सही ।
काश ! मैं तेरे दर्द भी अपनी तरफ मोड़ पाता
पर मैं बदकिस्मत तेरे हाथ की एक लकीर तक नहीं ।।
Enjoy Every Movement of life!

Apno mein aa gyi aaj ankahi si doori hai,
Sabke sath rehna bhi ban gayi mazboori hai🙌
अपनो में आ गई आज अनकही सी दूरी है,
सबके साथ रहना भी बन गई मजबूरी है🙌
