
लेकिन खुश आज फिर भी तुम नहीं।
यह चांद बुझा-बुझा सा लग रहा है
पास से न तो दूर से ही सही ।।
दु:ख तो बहुत मुझे तेरे दर्द का
अपना ना तो पराया ही सही ।
काश ! मैं तेरे दर्द भी अपनी तरफ मोड़ पाता
पर मैं बदकिस्मत तेरे हाथ की एक लकीर तक नहीं ।।

दिल के दर्द का एहसास तब हुआ जब हमारी परछाईं भी हमसे रूठ गई,
अँधेरे से लगता था डर और अब इस अँधेरे से जैसे यारी हो गई,
धड़कनों की तड़प अब बन गई है इस दिल की एक लोरी,
अब न किसी खुशी का इंतज़ार है, न कोई उम्मीद, हमें तो दर्द से मोहब्बत हो गई।
अँधेरे से लगता था डर और अब इस अँधेरे से जैसे यारी हो गई,
धड़कनों की तड़प अब बन गई है इस दिल की एक लोरी,
अब न किसी खुशी का इंतज़ार है, न कोई उम्मीद, हमें तो दर्द से मोहब्बत हो गई।
” target=”_blank” rel=”noopener noreferrer nofolllow external”>Translate Facebook Whatsapp
