
लेकिन खुश आज फिर भी तुम नहीं।
यह चांद बुझा-बुझा सा लग रहा है
पास से न तो दूर से ही सही ।।
दु:ख तो बहुत मुझे तेरे दर्द का
अपना ना तो पराया ही सही ।
काश ! मैं तेरे दर्द भी अपनी तरफ मोड़ पाता
पर मैं बदकिस्मत तेरे हाथ की एक लकीर तक नहीं ।।

Ki zindagi ke bare mai sochna bhi ek alag andaaz hai😊
Takdir mai hame vo he milta hai🙏
Jo upper Wale ne likha hota hai❤️
कि जिंदगी के बारे में सोचना भी एक अलग अंदाज हैं😊
तकदीर मे हमे वो ही मिलता है🙏
जो उपर वाले ने लिखा होता हैं❤️
Ohne door hon toh pehlaan ikk vaar bhi nahi sochya,
Bss aahi soch-soch zindagi guzarti main taan…