
लेकिन खुश आज फिर भी तुम नहीं।
यह चांद बुझा-बुझा सा लग रहा है
पास से न तो दूर से ही सही ।।
दु:ख तो बहुत मुझे तेरे दर्द का
अपना ना तो पराया ही सही ।
काश ! मैं तेरे दर्द भी अपनी तरफ मोड़ पाता
पर मैं बदकिस्मत तेरे हाथ की एक लकीर तक नहीं ।।

ਓਹ ਏਣਾ ਚਲਾਕ ਸੀ ਓਹਣੇ ਹਰ ਗਲ਼ ਤੇ ਦਿਮਾਗ ਲਾਇਆ
ਗੱਲਾਂ ਗੱਲਾਂ ਵਿੱਚ ਹੀ ਓਹਣੇ ਕਈ ਵਾਰ ਮੈਨੂੰ ਅਜ਼ਮਾਇਆ
ਏਹ ਚਲਾਕੀਆਂ ਓਹਦੀਆਂ ਦਾ ਕੀ ਕੇਹਣਾ
ਕਰ ਵਿਸ਼ਵਾਸ ਓਹਦੇ ਤੇ ਮੈਂ ਹਰ ਵਾਰ ਧੋਖਾ ਖਾਇਆ
—ਗੁਰੂ ਗਾਬਾ 🌷
ये और बात है, के उसने भुला दिया हमें
हमसे उसे आज तक, भुलाया नहीं गया।।
आंसू ना बहाए उसने, तो ये जान लीजिए
इश्क में उसे कभी, आजमाया नहीं गया।।
चाहते तो हम भी, मिल जाता बोहोत कुछ
हमसे ही ये सर कभी झुकाया नहीं गया।।
इश्क के सफ़र में, बोहोत दर्द है, थकन है
जाने क्यूं हमें ये , बताया नहीं गया।।