
लेकिन खुश आज फिर भी तुम नहीं।
यह चांद बुझा-बुझा सा लग रहा है
पास से न तो दूर से ही सही ।।
दु:ख तो बहुत मुझे तेरे दर्द का
अपना ना तो पराया ही सही ।
काश ! मैं तेरे दर्द भी अपनी तरफ मोड़ पाता
पर मैं बदकिस्मत तेरे हाथ की एक लकीर तक नहीं ।।
Enjoy Every Movement of life!

Don’t lose someone you can’t replace…
Unki samaj hamari samaj ko kabhi samaj hi naa payi vo is kadar nasamjh huye ki hamari paak mohabbat unhe na bhayi
उनकी समझ हमारी समझ को कभी समझ ही न पाई वो इस कदर नासमझ हुए कि हमारी पाक मोहब्बत उन्हें न भाई