Kash ek dua kabool ho,
Meri ibadat ke bagair.
Meri shaadi mere mehboob se hi ho,
Chahe ho gharwalo ko izazat ke bagair.
Kash ek dua kabool ho,
Meri ibadat ke bagair.
Meri shaadi mere mehboob se hi ho,
Chahe ho gharwalo ko izazat ke bagair.
अपने चेहरे से जो ज़ाहिर है छुपायें कैसे अपने चेहरे से जो ज़ाहिर है छुपायें कैसे तेरी मर्जी के मुताबिक नज़र आयें कैसे घर सजाने का तसव्वुर तो बहुत बाद का है पहले ये तय हो की इस घर को बचाएं कैसे क़हक़हा आँख का बर्ताव बदल देता है हंसने वाले तुझे आंसू नज़र आयें कैसे कोई अपनी ही नज़र से तो हमें देखेगा एक कतरे को समंदर नज़र आयें कैसे लाख तलवरे झुकी अती हो गरदन की तरफ सर झुकाना नहीं आता तो झुकाएं कैसे
