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Kaash ek dua kabool || Mehboob shayari

Kash ek dua kabool ho,

Meri ibadat ke bagair.

Meri shaadi mere mehboob se hi ho,

Chahe ho gharwalo ko izazat ke bagair.

Title: Kaash ek dua kabool || Mehboob shayari

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Intezaar tha shaam ka



कुछ तो संभाल रखा है ……..

सौ ख्वाबों को मिला के एक ख्वाब देख रखा है ,

ज़िंदगी ने जाने फिर भी क्या हिसाब रखा है ,

तू मशरुफ़ है तेरी अहमत में,

और मैंने तेरे इंतज़ार को संभाल रखा है ।

 

माना दर्द की सौगात लाता है इश्क़ जाना ,

फिर भी मैंने अपनी मुलाकातों का गुलाब रखा है ,

तेरे साथ ही तो चल रहा है वजूद मेरा ,

तेरी यादों  का मैंने एक तकियाँ भिगो रखा है ।

 

तेरा यू इंतज़ार करवाना ,मेरे दिल को खा जाता है ,

फिर भी तुझसे मिलने का अरमान सजा रखा है ,

कभी आओ खुल के सामने जो मेरे तुम तो दिखाऊ ,

टूटे दिल मे भी तेरे लिए एक महल सजा रखा है ।  

                                     ………….अजय कुमार । 

Title: कुछ तो संभाल रखा है ……..