ये किसने जेल में लाया खाना हाय अल्लाह,
मुजरिम का भी है कोई दीवाना हाय अल्लाह।
ये मज्मा भी मेरे रोने पे बजाता है ताली,
किसको सुनाएं अपना अफ़साना हाय अल्लाह।
अब क्या कि जुर्म किसने की है क़ुसुर है किसका,
अब तो लगा है मुझपर जुर्माना हाय अल्लाह।
मेरी नज़र क्या उस पे है सबकी नज़र मुझ पे है,
पूरा शहर है उसका दीवाना हाय अल्लाह।
वो मुझसे मिलता है रोज़ाना मगर नतीजा ये,
देखो तो लगता है वो बेगाना हाय अल्लाह।
जब भी किसी ने पूछा है धोखा कब मिला फिर तो,
बचपन का याद आए याराना हाय अल्लाह।
शिकवा नहीं है उससे बस दुख ‘अमीम’ इतना है,
क्यों मेरा लौट आया नज़राना हाय अल्लाह
मैं हूँ मुहब्बत,और मेरे मिटने का सवाल ही नहीं❤️
मैं रेत पर लिखी हुई कहानी नहीं
जो लहरों से मिट जाऊँ
मैं बारिश नहीं
जो बरस के थम जाऊँ
मैं हवा नहीं
जो तुम्हारे पास से गुज़र जाऊँ
मैं चाँदनी नहीं
जो रात के बाद ढल जाऊँ
तुम तो वो परवाने हो,
जो जलता रहेगा पर उफ़ तक नहीं करेगा💔
मैं शमा नहीं हूँ
जो परवाने को जला दु
मैं वो रंग हूँ
जो तेरी रूह पर चढ़कर कभी न उतरे
मैं तो वो मुहब्बत हूँ
जो तेरी रग-रग में लहू बन कर गर्दिश करे
Mann ✍️❤️