घूँट भर ख़्वाहिश नहीं है
मैं समंदर चाहता हूँ
लूट लो तुम ये हवाएँ
मैं बवंडर चाहता हूँ
- – Vishakt ki Kalam se
घूँट भर ख़्वाहिश नहीं है
मैं समंदर चाहता हूँ
लूट लो तुम ये हवाएँ
मैं बवंडर चाहता हूँ
Mera deen iman jahan e oh🙇🏻♀️
Jaan lekhe ohde laawi rabba🤗..!!
Zind ohde naawe likhde tu🙏
Menu ohda hi bnawi rabba😇..!!
ਮੇਰਾ ਦੀਨ ਈਮਾਨ ਜਹਾਨ ਏ ਉਹ🙇🏻♀️
ਜਾਨ ਲੇਖੇ ਉਹਦੇ ਲਾਵੀਂ ਰੱਬਾ🤗..!!
ਜ਼ਿੰਦ ਓਹਦੇ ਨਾਂਵੇ ਲਿਖਦੇ ਤੂੰ🙏
ਮੈਨੂੰ ਉਹਦਾ ਹੀ ਬਣਾਵੀਂ ਰੱਬਾ😇..!!
हमें सफलता से प्रेम करने की आवश्यकता है। हम सब सफलता हासिल तो करना चाहते है लेकिन दूसरों की सफलताओं से ईर्ष्या भी करते हैं। यह तो वही बात हुई कि हम सफल होने के बारे में, कामयाबी के विषय में केवल सोचते हैं कोई एक्शन नहीं ले रहे हैं। वास्तव में हम दूसरों की सफलताओं से प्रेरणा लेने की तुलना में जलन की भावना से ज्यादा पीड़ित रहते हैं। नियम है सफलता ही सफलता को आकर्षित करती है। इसके लिए हमें सफलता से प्रेम करने की जरूरत है। किसी को आगे बढ़ते देख खुश होना एक सफल और संतुष्ट व्यक्ति की पहचान होती है। एक सच्चा विजेता ही दूसरे विजेता को सम्मान दे सकता हैं। इंसान के रूप में हमें जीवन को सरल और सौहार्द्र के साथ व्यतीत करने की आवश्यकता है।
हमें स्वयं ही प्रयास करना होगा कोई और हमारी सहायता नहीं कर सकता। हमें खुद को विकसित करने की आवश्यकता है।