घूँट भर ख़्वाहिश नहीं है
मैं समंदर चाहता हूँ
लूट लो तुम ये हवाएँ
मैं बवंडर चाहता हूँ
- – Vishakt ki Kalam se
Enjoy Every Movement of life!
घूँट भर ख़्वाहिश नहीं है
मैं समंदर चाहता हूँ
लूट लो तुम ये हवाएँ
मैं बवंडर चाहता हूँ
मिलेगी परिंदों को मंजिल यकीनन
यह उनके फैले हुए पर बोलते है
अक्सर वो लोग खामोश रहते हैं
जमाने में जिनके हुनर बोलते हैं
इक बात दिल मे आती है देखू उसे जितनी दफा।
हमने तो मोहब्बत के किस्से सुने थे अब तो दोस्त भी होते है बेबफा ।।
ik baat dil me aati hai dekhu use jitni dafaa
hamne to mohobat ke kisse sune the ab to dost bhi hote hai bewafa