घूँट भर ख़्वाहिश नहीं है
मैं समंदर चाहता हूँ
लूट लो तुम ये हवाएँ
मैं बवंडर चाहता हूँ
- – Vishakt ki Kalam se
Enjoy Every Movement of life!
घूँट भर ख़्वाहिश नहीं है
मैं समंदर चाहता हूँ
लूट लो तुम ये हवाएँ
मैं बवंडर चाहता हूँ
koee ajanabee khaas ho raha hai,
lagata hai phir pyaar ho raha hai…
कोई अजनबी ख़ास हो रहा है,
लगता है फिर प्यार हो रहा है…
