घूँट भर ख़्वाहिश नहीं है
मैं समंदर चाहता हूँ
लूट लो तुम ये हवाएँ
मैं बवंडर चाहता हूँ
- – Vishakt ki Kalam se
घूँट भर ख़्वाहिश नहीं है
मैं समंदर चाहता हूँ
लूट लो तुम ये हवाएँ
मैं बवंडर चाहता हूँ
ਨਿਭਾਈਆਂ ਕਿਥੋਂ ਜਾਣੀਆਂ
ਬੇਕਦਰਾਂ ਨੂੰ ਕਦਰ ਕਿੱਥੇ ਸਮਝ ਆਉਣੀ
ਜਿਹਨੇ ਦਿਤਾ ਹੋਵੇ ਜ਼ਹਿਰ ਹਰ ਇਕ ਨੂੰ
ਓਹਨੂੰ ਕਿਸੇ ਇੱਕ ਨੂੰ ਦਿੱਤੇ ਹੋਏ ਸ਼ਰਮ ਕਿਥੇ ਆਉਣੀ🙌
Nibhayian kitho janiya
Bekadran nu kadar kithe samjh auni
Jihne ditta Howe zehar har ikk nu
Ohnu kise ik nu dite hoye sharam kithe auni🙌
किसी ने अच्छा,किसी ने बुरा बताया है
मेरे बारे जिसने जो सुना,वही सुनाया है
हम दोनो के दिन पर,टंगी है एक तख्ती
उसने सावधान, हमने खतरा लगाया है
हम जब जब बढ़े हैं,तो गिराया है उसने
वो जब जब गिरा, हमने हाथ बढ़ाया है
भैरव,मेरा कोहिनूर,ये पूछ रहा है हमसे
अरे क्यूं नाम के आगे,फ़कीर लगाया है