ये न जाने मुझे क्या नज़र आ रहा है,
चेहरा तो है वही मगर किरदार बदला जा रहा है!🥀
Enjoy Every Movement of life!
ये न जाने मुझे क्या नज़र आ रहा है,
चेहरा तो है वही मगर किरदार बदला जा रहा है!🥀
कभी तेजी रखू, सफर में कभी मैं, ढलने लगता हूं..
कभी ठहर जाऊ, एक जगह कभी बस, चलने लगता हूं..
मंजिल का अता और पता नहीं, फासला सफर का जरा बढ़ गया..
सोच कर कमाई बस, सफर की हथेलियों को, मालने लगता हूं..
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