तुम पूछते थे न किअगर यूँ होता तो क्या होतासुन ले- ऐ ग़ालिब,आज तू होता तो बहुत रोताबड़े महलों के सामनेइंसानी वजूद भी पड़ गया छोटाजहाँ वो अमीर प्लेट फेकतावहीं मैं गरीब भूखा सोता
Enjoy Every Movement of life!
तुम पूछते थे न किअगर यूँ होता तो क्या होतासुन ले- ऐ ग़ालिब,आज तू होता तो बहुत रोताबड़े महलों के सामनेइंसानी वजूद भी पड़ गया छोटाजहाँ वो अमीर प्लेट फेकतावहीं मैं गरीब भूखा सोता
सफर वही तक जहाँ तक तुम हो,
नज़र वही तक जहाँ तक तुम हो,
वैसे तो हज़ारों फूल खिलतें हैं गुलशन में मगर,
खुशबू वही तक जहाँ तक तुम हो।
Mohobbat ek alag ehsas e
Roohani jazbeyan naal bharpoor
Jismani rishteyan to kohan door..!!
ਮੋਹੁੱਬਤ ਇੱਕ ਅਲੱਗ ਅਹਿਸਾਸ ਏ
ਰੂਹਾਨੀ ਜਜ਼ਬਿਆਂ ਨਾਲ ਭਰਪੂਰ
ਜਿਸਮਾਨੀ ਰਿਸ਼ਤਿਆਂ ਤੋਂ ਕੋਹਾਂ ਦੂਰ..!!