Me Hasdi roj roj aapne dukhan nu lukon lai
te lok kehnde..
Kash sadhi zindagi v eidan wardi howe
ਮੈ ਹੱਸਦੀ ਰੋਜ ਰੋਜ ਅਾਪਣੇ ਦੁੱਖਾਂ ਨੂੰ ਲਕੋਣ ਲਈ,
ਤੇ ਲੋਕ ਕਹਿੰਦੇ….
ਕਾਸ਼ ਸਾਡੀ ਜਿੰਦਗੀ ਵੀ ੲੇਂਦੇ ਵਰਗੀ ਹੋਵੇ..
Me Hasdi roj roj aapne dukhan nu lukon lai
te lok kehnde..
Kash sadhi zindagi v eidan wardi howe
ਮੈ ਹੱਸਦੀ ਰੋਜ ਰੋਜ ਅਾਪਣੇ ਦੁੱਖਾਂ ਨੂੰ ਲਕੋਣ ਲਈ,
ਤੇ ਲੋਕ ਕਹਿੰਦੇ….
ਕਾਸ਼ ਸਾਡੀ ਜਿੰਦਗੀ ਵੀ ੲੇਂਦੇ ਵਰਗੀ ਹੋਵੇ..
“हंसी में छिपे खामोशियों को महसूस किया है I
मैखाने में बुजुर्गों को भी जवान होते देखा है I
हमने इन्शानो को जरुरत के बाद अनजान होते देखा है I
क्यों भूल जाते है इंसान अपनी अस्तित्व पैसा आते ही I
दुनियां ने बड़े – बड़े राज महराजा को फ़क़ीर होते देखा है I”
अब बस लिख के मिटा हम देते हैं, अपने ही शब्दों के जाल को..
क्यूंकि अब डायरी भी समझ नहीं पाती है, मेरे मन में चलते ख्याल को..
अब पन्ने भी मेरी कलम की स्याही से, बस दूर सा होना चाहते हैं..
अब बताएं भी तो आखिर किसे बताएं, अपने इस बिगडते हाल को..