मोहब्बत है कोई लगाव नहीं,
मोहब्बत है कोई लगाव नहीं,
कांटो भरी रह है कोई फुलो की चादर नहीं,
अगर हंस के गुजर दिए हर लम्हे तो,
अगर हंस के गुजर दिए हर लम्हे तो,
वो मोहब्बत कैसी,
क्या मोहब्बत तो तुम्हें रोना भी सिखाती है…
Enjoy Every Movement of life!
मोहब्बत है कोई लगाव नहीं,
मोहब्बत है कोई लगाव नहीं,
कांटो भरी रह है कोई फुलो की चादर नहीं,
अगर हंस के गुजर दिए हर लम्हे तो,
अगर हंस के गुजर दिए हर लम्हे तो,
वो मोहब्बत कैसी,
क्या मोहब्बत तो तुम्हें रोना भी सिखाती है…
सरगोशियां हवाओ की सुनी जो कानो ने।
गुफ्तगू तेरी सुनी थी खामोश अफसानो ने।
मुस्कराना तेरा तो,एक दिलनशीं अदा थी।
ज़रा सुन भी लेते कहा क्या है ,दीवानो ने।
वो लचक जाना ,तेरी कमर का चलते चलते।
खुली लूट मची थी मनचलों के ख़जानो मे..