मोहब्बत है कोई लगाव नहीं,
मोहब्बत है कोई लगाव नहीं,
कांटो भरी रह है कोई फुलो की चादर नहीं,
अगर हंस के गुजर दिए हर लम्हे तो,
अगर हंस के गुजर दिए हर लम्हे तो,
वो मोहब्बत कैसी,
क्या मोहब्बत तो तुम्हें रोना भी सिखाती है…
Enjoy Every Movement of life!
मोहब्बत है कोई लगाव नहीं,
मोहब्बत है कोई लगाव नहीं,
कांटो भरी रह है कोई फुलो की चादर नहीं,
अगर हंस के गुजर दिए हर लम्हे तो,
अगर हंस के गुजर दिए हर लम्हे तो,
वो मोहब्बत कैसी,
क्या मोहब्बत तो तुम्हें रोना भी सिखाती है…
घूँट भर ख़्वाहिश नहीं है
मैं समंदर चाहता हूँ
लूट लो तुम ये हवाएँ
मैं बवंडर चाहता हूँ
रख हौसला वो मंजर भी आएगा
प्यासे के पास चलकर समंदर भी आएगा
थक कर ना बैठ ए मंजिल के मुसाफिर
मंजिल भी मिलेगी मिलने का मजा भी आएगा