मोहब्बत है कोई लगाव नहीं,
मोहब्बत है कोई लगाव नहीं,
कांटो भरी रह है कोई फुलो की चादर नहीं,
अगर हंस के गुजर दिए हर लम्हे तो,
अगर हंस के गुजर दिए हर लम्हे तो,
वो मोहब्बत कैसी,
क्या मोहब्बत तो तुम्हें रोना भी सिखाती है…
मोहब्बत है कोई लगाव नहीं,
मोहब्बत है कोई लगाव नहीं,
कांटो भरी रह है कोई फुलो की चादर नहीं,
अगर हंस के गुजर दिए हर लम्हे तो,
अगर हंस के गुजर दिए हर लम्हे तो,
वो मोहब्बत कैसी,
क्या मोहब्बत तो तुम्हें रोना भी सिखाती है…
Me tumahri saadgi ki kyaa misaal du
is saare yahaa me be-misaal ho tum
मैं तुम्हारी सादगी की क्या मिसाल दूँ
इस सारे जहां में बे-मिसाल हो तुम
जा रहा हूं जिंदगी से अब न लौट के आऊंगा
न कोई चिराग अब जलाऊंगा,न कोई अंधेरा मिटाऊंगा
जो रह गई याद तो उसे नदियों में बहाऊंगा
जो मिल गए राहों में तो रस्ता बदल जाऊंगा
बांधा था जिस रिश्ते से वो रिश्ता तोड़ जाऊंगा
नीर भरे नयनों में एक तड़प छोड़ जाऊंगा
कीचड़ ही सही एक दिन कमल बन खिल जाऊंगा
जा रहा हूं जिंदगी से अब न लौट के आऊंगा