मोहब्बत नही तो मोहब्बत को इंकार करो,
मैंने कब कहा की तुम भी मुझ पर ऐतबार करो,
खुदा की कसम नही देखेंगे तुम्हे कभी पलट कर जिंदगी भर,
मैंने कब कहा की तुम पीछे से मुझ पर वार करो
Enjoy Every Movement of life!
मोहब्बत नही तो मोहब्बत को इंकार करो,
मैंने कब कहा की तुम भी मुझ पर ऐतबार करो,
खुदा की कसम नही देखेंगे तुम्हे कभी पलट कर जिंदगी भर,
मैंने कब कहा की तुम पीछे से मुझ पर वार करो
सरगोशियां हवाओ की सुनी जो कानो ने।
गुफ्तगू तेरी सुनी थी खामोश अफसानो ने।
मुस्कराना तेरा तो,एक दिलनशीं अदा थी।
ज़रा सुन भी लेते कहा क्या है ,दीवानो ने।
वो लचक जाना ,तेरी कमर का चलते चलते।
खुली लूट मची थी मनचलों के ख़जानो मे..
एक पत्नी के सुविचार:
काश तुम अदरक होते…
कसम से, जी भर के कूटती।