My life
My rule
that’s my attitude
My life
My rule
that’s my attitude
दिवाली पर पापा को बोनस मिलता था तनख्वाह थोड़ी ज्यादा आती थी सबको मालूम था दिवाली पर भी नए कपड़े लेने के लिए पैसे गिनकर मिलते थे कोई अगर बीमार हो जाए तो वो नए कपड़े भी कैंसल हो जाते थे। बचपन से ही एडजस्ट करने की आदत लग जाती है ये आदत अच्छी हो होती है पर कभी कभी बुरी भी होती है। धीरे धीरे बड़े हुए तो पता था मम्मी पापा को कुछ बनकर दिखाना है ये ख्वाब साथ लेकर चला पर बाहर निकले घर से तो ये पता चला कि जो मेरा ख्वाब है वही सबका भी ख्वाब था सबको अपनी जिंदगी में मेरी तरह ही कुछ करना था। जैसे तैसे एक नौकरी लगी वो भी मेरी पसंद की नही थी पर पापा का हाथ बंटाने के लिए भी तो कुछ करना था अपने दिल को समझकर वो नौकरी कर ली मुझे नौकरी लगी ये सुनकर मम्मी पापा दोनो खुश हो जाए पापा की आखों से तो आंसू ही आ गए आंखो से निकलते आंसू भी उस दिन मुझसे बात कर रहे थे मानो वो ये कह रहे थे की अब मेरे कंधो का थोड़ा बोझ कम हुआ मेरे साथ कोई कमाने वाला आ गया। उस दिन से मैंने वो नौकरी ज्वाइन कर ली और उसकी भी आदत सी पड़ गई।
Ikk var tu dil di suni zaroor
Fikran jagg diyan nu fizool rakhi..!!
Je pyar pauna fer gurha pawi
Te nibhawan da vi asool rakhi..!!
ਇੱਕ ਵਾਰ ਤੂੰ ਦਿਲ ਦੀ ਸੁਣੀ ਜ਼ਰੂਰ
ਫ਼ਿਕਰਾਂ ਜੱਗ ਦੀਆਂ ਨੂੰ ਫਿਜ਼ੂਲ ਰੱਖੀਂ..!!
ਜੇ ਪਿਆਰ ਪਾਉਣਾ ਫਿਰ ਗੂੜ੍ਹਾ ਪਾਵੀਂ
ਤੇ ਨਿਭਾਵਨ ਦਾ ਵੀ ਅਸੂਲ ਰੱਖੀਂ..!!