Toote khuwaab ki tasveer kab poori hoti hai
Chand aur taaro ke beech bhi doori hoti hai
Deena toh uppar wala hame sab kuch chahata hai
Par uski bhi kuch majboori hoti hai
Toote khuwaab ki tasveer kab poori hoti hai
Chand aur taaro ke beech bhi doori hoti hai
Deena toh uppar wala hame sab kuch chahata hai
Par uski bhi kuch majboori hoti hai
गजल (बे बहर)
जाने क्या हो गया है कैसी इम्तिहान की घड़ी है,
एक आशिक पे ये कैसी सजा आन पड़ी है!
आस भी क्या लगाएं अबकी होली पे हम उनसे,
दुनिया की ये खोखली रस्में तलवार लिए खड़ी है!
मैंने देखें हैं गेसुओं के हंसते रुखसार पे लाली
मगर हमारे चेहरे पे फिर आंसुओं की लड़ी है!
दर्द है, हिज्र है,और धुंधली सी तस्वीर का साया भी
तुम महलों में रहते हो तुमको हमारी क्यों पड़ी है !!
कैसे मुकर जाऊं मैं खुद से किए वादों से अभी,
अब मेरे हाथों में ज़िम्मेदारियों की हथकड़ी है!
तुमको को प्यार है दौलत ए जहां से अच्छा है,
मगर इस जहान में मेरे लिए मां सबसे बड़ी है !!
Har din kuj nawa sikhan di koshish karo
Beete same nu yaad karn da koi fayida nahi🙌
ਹਰ ਦਿਨ ਕੁਝ ਨਵਾਂ ਸਿੱਖਣ ਦੀ ਕੋਸ਼ਿਸ਼ ਕਰੋ
ਬੀਤੇ ਸਮੇਂ ਨੂੰ ਯਾਦ ਕਰਨ ਦਾ ਕੋਈ ਫਾਇਦਾ ਨਹੀਂ।🙌