
tu lakh de zakham rona assi v nahi
oh tere kol aa kadr kar sajjana
kyunki saari umar ta jeona assi v nahi

Teri Yaad Nu Bura Kyun Kahiye,
Jehri Har Pal Saath Nibhaundi Ae,
Tere Naalo Ta Teri Yaad Hi Changi,
Jehri Haale V Saanu Milan Aundi Ae,
Dukh Dil Vich Luko Ke Hanju Naina Vich Pro K, Tere Aan Di Udeek Asi Layi Baithe Ha,
Kar Tu Yakeen Sanu Bhul Jaan Waleya,
Asi Tere Piche Duniya Bhulai Baithe Ha
अकबर बादशाह को मजाक करने की आदत थी। एक दिन उन्होंने नगर के सेठों से कहा-
“आज से तुम लोगों को पहरेदारी करनी पड़ेगी।”
सुनकर सेठ घबरा गए और बीरबल के पास पहुँचकर अपनी फरियाद रखी।
बीरबल ने उन्हें हिम्मत बँधायी,
“तुम सब अपनी पगड़ियों को पैर में और पायजामों को सिर पर लपेटकर रात्रि के समय में नगर में चिल्ला-चिल्लाकर कहते फिरो, अब तो आन पड़ी है।”
उधर बादशाह भी भेष बदलकर नगर में गश्त लगाने निकले। सेठों का यह निराला स्वांग देखकर बादशाह पहले तो हँसे, फिर बोले-“यह सब क्या है ?”
सेठों के मुखिया ने कहा-
“जहाँपनाह, हम सेठ जन्म से गुड़ और तेल बेचने का काम सीखकर आए हैं, भला पहरेदीर क्या कर पाएँगे, अगर इतना ही जानते होते तो लोग हमें बनिया कहकर क्यों पुकारते?”
बादशाह अकबर बीरबल की चाल समझ गए और अपना हुक्म वापस ले लिया।