Skip to content

TUMSE MILKE || hindi shayari || love shayari

jaane anjane mai mile the hum tumse
koi irada nahi tha dillagi karne ka
fir jab kari dillagi tumse
toh irada nahi tha tumse dur jaane ka
ki yaad hai mujhe vo har lamha 
jo humne sath bitaya hai
kuch haseen pal kuch rangeen shamein sath bitaye jo saal tumne
kya tumhara irada tha humko chodd jane ka
shuruaat toh aksar sabhi rishto ki sahi hoti hai 
lekin har kisi mai vo dum nahi rishta nibha jaane kaa….😇

Title: TUMSE MILKE || hindi shayari || love shayari

Best Punjabi - Hindi Love Poems, Sad Poems, Shayari and English Status


Khuab shayari || sad but true lines

Sad but true Punjabi shayari || ਖ਼ਵਾਬਾਂ ਦੀ ਦੁਨੀਆ ਵੀ ਕਿੰਨੀ ਰੰਗੀਨ ਹੈ 
ਨਿੱਤ ਹੀ ਖਵਾਬ ਦੇਖਦੇ, ਨਿੱਤ ਹੀ ਟੁੱਟਦੇ 
ਪਰ ਫੇਰ ਵੀ ਇਹ ਖ਼ਵਾਬਾਂ ਦੀ ਦੁਨੀਆ 
ਸੱਚ ਹੀ "ਜਲੰਧਰੀ" ਬੜੀ ਹਸੀਨ ਹੈ 
ਫੇਰ ਵੀ ਬੜੀ ਹਸੀਨ ਹੈ....... 
ਖ਼ਵਾਬਾਂ ਦੀ ਦੁਨੀਆ ਵੀ ਕਿੰਨੀ ਰੰਗੀਨ ਹੈ 
ਨਿੱਤ ਹੀ ਖਵਾਬ ਦੇਖਦੇ, ਨਿੱਤ ਹੀ ਟੁੱਟਦੇ 
ਪਰ ਫੇਰ ਵੀ ਇਹ ਖ਼ਵਾਬਾਂ ਦੀ ਦੁਨੀਆ 
ਸੱਚ ਹੀ “ਜਲੰਧਰੀ” ਬੜੀ ਹਸੀਨ ਹੈ 
ਫੇਰ ਵੀ ਬੜੀ ਹਸੀਨ ਹੈ……. 

Title: Khuab shayari || sad but true lines


Phoolo ne kabhi || Shayari

फूलों ने कभी तोड़ने का दर्द कहा है,
कांटों ने ही हमेशा दुश्मनी निभाई है;
मोहब्बत भी फना का ही एक और नाम है,
यह रूसवा तो​ हुई है, पर इसने हमेशा वफादारी निभाई है।

ऐ चांद तेरे आने का सबब सबको मालूम नहीं,
कुछ लोग दिया जलाते हैं, और कुछ दिल जलाते हैं;
या वो अच्छी हैं या बुरी, हसरतें तो अपनी हैं,
मगर लोग अक्सर दाग तुझ पर लगाते हैं।

ऐ मेरे दोस्त तू समन्दर बन जा,
क्या खोया क्या पाया इसकी चाहत न कर;
तेरे अंदर ही एक मुकम्मल जहां है,
तू बाहर से किसी और की आस न कर।

मुमकिन है कि मंजिलें मुझसे दूर बहुत हैं,
पर रास्ते पर चलना मेरी फितरत बन गयी है;
उजाले समेटने में कोई वाहवाही नहीं,
अन्धेरों में रोशनी करना मेरी आदत बन गयी है।

ऐसे चलो कि चल के फिर गिरना न पड़े,
इतना उठो कि उठ के फिर झुकना न पड़े;
लेकिन गिरना, उठना तेरे बस में नहीं ऐ दोस्त,
इसलिए उसका हाथ पकड़ के चलो कि फिर रोना न पड़े।

मां के हाथों की बरकत का अंदाजा इस से हो गया,
थी एक वक्त की रोटी हर रोज,
और तीस वर्ष तक गुजारा हो गया;
आज रोटी तो है हर वक्त की, लेकिन वो वक्त कहीं पर खो गया।

ऐ जिंदगी, ये तेरे सवाल की तारीफ नहीं,
यह मेरे जवाब का हुनर कि जिंदगी की उलझने सुलझती चली गयीं;
मैं तो बस अपने दिल की कह रहा था,
और कहानियां बनती चली गयीं।

न थी जिंदगी से शिकायत,
न वक्त से कुछ गिला था;
जो मुझको नहीं मिला,
वो खुद मेरा ही सिला था;
मदद-ओ-मशवरे कम नहीं थे मददगारों के,
पर अफसोस जो तकदीर ने दिया था वह दर्द ही मुझे मिला था।

ऐ वतन कर्ज तो तेरा मैं जब उतारूं, जब मेरे पास कुछ अपना भी हो; तेरी मिट्टी, तेरा पानी, तेरी हवा, तेरी धूप, तेरी छांव, तेरी रोटी और नाम तेरा, फिर भी बस एक कतरा ही बन पाउं तेरा, तो मैं समझूं और तुझको मैं अपना पुकारूं।

जिंदगी जीने का अंदाज तो आया मगर अफसोस,
वो मुकम्मल एहसास नहीं आया;
वो हुनर तो आया मगर,
ऐ बदनसीबी वो मुकाम कभी नहीं आया।

यूं गलतफहमियां पाला न करो,कभी आईने में खुद को निहारा भी करो; ये जो चेहरा है वो सब कुछ बयां कर देता है; कभी इसको जुबां पर उतारा भी करो।

आशुतोष श्रीवास्तव

Title: Phoolo ne kabhi || Shayari