madhosh rho apni duniya mein|sad shayari
Jao raho madhosh tum duniya mein apni..
Ud jayenge ek din hm b diwane se..
Tum pushte rhoge pta hmara zamane se..!!

madhosh rho apni duniya mein|sad shayari
Jao raho madhosh tum duniya mein apni..
Ud jayenge ek din hm b diwane se..
Tum pushte rhoge pta hmara zamane se..!!

“The ones who are adequately enough to figure they can change the world, are the ones who do.”
. “Try not to speak loudly, further develop your contention.”
चलो किसी पुराने दौर की बात करते हैं,
कुछ अपनी सी और कुछ अपनों कि बात करते हैं…
बात उस वक्त की है जब मेरी मां मुझे दुलारा करती थी,
नज़रों से दुनिया की बचा कर मुझे संवारा करती थी,
गलती पर मेरी अकेले डांट कर पापा से छुपाया करती थी,
और पापा के मुझे डांटने पर पापा से बचाया करती थी…
मुझे कुछ होता तो वो भी कहाँ सोया करती थी,
देखा है मैंने,
वो रात भर बैठकर मेरे बाल संवारा करती थी,
घर से दूर आकर वो वक्त याद आता है,
दिन भर की थकान के बाद अब रात के खाने में, कहां मां के हाथ का स्वाद आता है,
मखमल की चादर भी अब नहीं रास आती है,
माँ की गोद में जब सिर हो उससे अच्छी नींद और कहाँ आती है…