Yaad vo aaya hai barsaat ki trah,
Baat karne mein chehkta tha jo koyal ki trah..
याद वो आया है बरसात में बादल की तरह,
बात करने में चहकता था जो कोयल की तरह।
Enjoy Every Movement of life!
Yaad vo aaya hai barsaat ki trah,
Baat karne mein chehkta tha jo koyal ki trah..
याद वो आया है बरसात में बादल की तरह,
बात करने में चहकता था जो कोयल की तरह।
इश्क़ है …न चाह है तुझे पाने की,
फिर भी करीब रहो ये अच्छा लगता है,,
ख्वाब है न हकीकत है.. दरमियाँ अपने
फिर भी तुम्हें सोचना अच्छा लगता है,,
दूर हो न करीब ही हो मेरे “जाना”
फिर भी तू हमकदम हो अच्छा लगता है,,
पराया है न अपना ही है तू मेरा
फिर भी तेरा साथ अच्छा लगता है।।🌻🌻
