जो दर्द छुपा था सहमी सी आँखों में उसकी, वक़्त लगा पर दिख गया..
उसे भी शायद कोई गम था ऐसा, जो बेरहम इस जमाने से झिक गया..
आँखें मूंदी कई बार तो उसने, शायद गम को कहीं वो छुपा सके..
मगर हर आंसू जो उसकी आंखों से बहा, अपने हर दर्द की दास्तां लिख गया..
जो दर्द छुपा था सहमी सी आँखों में उसकी, वक़्त लगा पर दिख गया..
उसे भी शायद कोई गम था ऐसा, जो बेरहम इस जमाने से झिक गया..
आँखें मूंदी कई बार तो उसने, शायद गम को कहीं वो छुपा सके..
मगर हर आंसू जो उसकी आंखों से बहा, अपने हर दर्द की दास्तां लिख गया..
उल्टे सीधे सपने पाले बैठे हैं
सब पानी में काँटा डाले बैठे हैं
इक बीमार वसीयत करने वाला है
रिश्ते नाते जीभ निकाल बैठे हैं
बस्ती का मामूल पे आना मुश्किल है
चौराहे पर वर्दी वाले बैठे हैं
धागे पर लटकी है इज़्ज़त लोगों की
सब अपनी दस्तार सँभाले बैठे हैं
साहब-ज़ादा पिछली रात से ग़ायब है
घर के अंदर रिश्ते वाले बैठे हैं
आज शिकारी की झोली भर जाएगी
आज परिंदे गर्दन डाले बैठे हैं