
Na rakh saamb k dard apne nu
ehnu niklan de folaad ban k
pachhtaunge dard den wale tad
jad tere bol lokaan di jubaan ban gae

Na rakh saamb k dard apne nu
ehnu niklan de folaad ban k
pachhtaunge dard den wale tad
jad tere bol lokaan di jubaan ban gae
आग को बुझा देता है क्रोध ।
आग जलते है हवा में, लेकिन चिंगारी में जलता है क्रोध।
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अपना कविता किसी को मत पढ़ाओ।
अगर कोई पढ़ना चाहते है, उसे सच ढूंढ़ने के लिए बताओ।
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जबाब हर बात पे मत दो।
सिर्फ वक्त का इंतज़ार करो।
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जब बन रहे हों, सुनना पड़ता हैं।
जब बन गये हों, लोग सुनने आते हैं।
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रिश्ते आसमान की रूप।
आज बारिश, कल धूप।
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बात लहर की तरह।
जनम देती रिश्ते, टूटती भी रिश्ते, सोचो ज़रा।
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मैदान में जितना राजनीती होता है, उससे भी ज्यादा होता है घर पर।
घर का बाप ही बनता है नेता, नेता पैदा भी होता हे घर पर।
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जो तुम्हे पाता है, वो किसी को मत बताओ।
समय में प्रयोग करो, नहीं तो लोग समझेंगे के तुम मुर्ख हो।
बात अगर मैं करू तो इतराता बहुत है ,
प्यार तो वो भी करता है मगर शर्माता बहुत है ,
शांत रहता है जो मेरे सामने ,
लोग कहते हैं कि उसे गुस्सा आता बहुत है ,
भूल जाता है जो सब कुछ आते ही मेरे सामने,
क्लास में जो पहले नंबर पर आता बहुत है,
उसकी हंसी से बचे तो उसकी आंखों में डूब गए ,
गुरुर था कि हमें तैरना आता बहुत है!💯🥀