Just when I thought I’ve learned to deal with your absence,
your memories flashbacked in front of me.
Just when I thought I’ve learned to deal with your absence,
your memories flashbacked in front of me.
माथे पे तिलक लगाकर कूद पड़े थे अंग़ारो पे,
माटी की लाज के लिए उनके शीश थे तलवारों पे।
भगत सिंह की दहाड़ के मतवाले वो निर्भर नहीं थे किन्ही हथियारों पे,
अरे जब देशहित की बात आए तो कभी शक ना करो सरदारों पे॥
आज़ादी की थी ऐसी लालसा की चट्टानों से भी टकरा गये,
चंद आज़ादी के रणबाँकुरो के आगे लाखों अंग्रेज मुँह की खा गये।
विद्रोह की हुंकार से गोरों पे मानो मौत के बादल छा गये,
अरे ये वही भगत सिंह, राजगुरु और सुखदेव है जिनकी बदौलत हम आज़ादी पा गये॥
आज़ादी मिली पर इंक़लाब की आग में अपने सब सुख-दुःख वो भूल गये,
जननी से बड़ी माँ धरती जिसकी ख़ातिर भगत सिंह, सुखदेव और राजगुरु झूल गये॥
अब राह तक रही उस माँ को कौन जाके समझाएगा,
कैसे बोलेगा उसको की माँ अब तेरा लाल कभी नहीं आएगा।
बस इतना कहूँगा कि धन्य हो जाएगा वो आँचल जो भगत सिंह, सुखदेव और राजगुरु सा बेटा पाएगा,
क्योंकि इस माटी का हर कण और बच्चा-बच्चा उसे अपने दिल में बसाएगा॥
Rishte kache dhage waang hunde aa
sajjan adh hoye fir kehnde chal dubaara milde aa
dubaara mil taan gaye par oh tutte hoye dhaage di gandh hale tak radhakdi aa
ਰਿਸ਼ਤੇ ਕੱਚੇ ਧਾਗੇ ਵਾਂਗ ਹੁੰਦੇ ਆ,
ਸੱਜਣ ਅੱਡ ਹੋਏ ਫਿਰ ਕਹਿੰਦੇ ਚੱਲ ਦੁਬਾਰਾ ਮਿਲਦੇ ਆ,
ਦੁਬਾਰਾ ਮਿਲ ਤਾਂ ਗਏ ਪਰ ਉਹ ਟੁੱਟੇ ਹੋਏ ਧਾਗੇ ਦੀ ਗੰਢ ਹਲੇ ਤੱਕ ਰੜ੍ਹਕਦੀ ਆ
Simu