Takdeeran da khel eh sabh
khahishaan hi ne bande diyaan
jo samajhdiyaan ni
ਤਕਦੀਰਾਂ ਦਾ ਖੇਲ ਇਹ ਸਬ
ਖਾਹਿਸ਼ਾਂ ਹੀ ਨੇ ਬੰਦੇ ਦੀਆਂ
ਜੋ ਸਮਝਦੀਆਂ ਨੀ
Takdeeran da khel eh sabh
khahishaan hi ne bande diyaan
jo samajhdiyaan ni
ਤਕਦੀਰਾਂ ਦਾ ਖੇਲ ਇਹ ਸਬ
ਖਾਹਿਸ਼ਾਂ ਹੀ ਨੇ ਬੰਦੇ ਦੀਆਂ
ਜੋ ਸਮਝਦੀਆਂ ਨੀ
Jra Si Himmat Agr Ho Honslo Me…
Chali Aati Hai Manzil Thokro Me…
ख़िज़ाँ का दौर हो या हो बहार का मौसम
मेरे लिए नहीं कोई क़रार का मौसम
किसे ख़बर थी बिछड़कर न मिल सकेंगे कभी
न ख़त्म होगा तेरे इन्तिज़ार का मौसम
ग़रज़ का दौर है सबको हैं अपनी अपनी धुन
किसी को रास न आया पुकार का मौसम
ढला है हुस्न तो मशहूर बेवफ़ाई हुई
गुज़र गया है तेरे इन्तिज़ार का मौसम
उड़ाए फिरती है आवारगी की आंधी हमें
हमें नसीब कहाँ ज़ुल्फ़-ए- यार का मौसम
बुझे हैं रेख़्ता हम तो बुझे नज़ारे हैं
उदास उदास लगा हुस्न -ए- यार का मौसम